Welcome:         

History of Kashipur

Kashipur is one of the famous city in Udham Singh Nagar district in Uttaranchal, India. Kashipur was known since the Mahabharat times. Kashipur is a Historical and Holy place. It is said that a Chinese Scholar Yaun Chwang describe's Drona Sagar as an ancient and Holy place. One can easily identify the remains of the old city in Kashipur. Kashipur city was named after one of the officer of Chand Kings of Kumaon i.e. Kashinath Adhikari who is also known as founder of this place.


Kashipur is city of great Religious and Historical importance. During the Chalcolithic age, Kashipur was one of the developed city of India and it trades in copper implements and utensils which were supplied as far as Central Asia (Confirmed by Archeological Survey of India). Today also, Kashipur is famous because of its industries which also led to the development of the region. Some of the main industrial estates here are Nand Nagar Industrial Estate, Bheem Nagar Industrial Estate, Balaji Industrial Estate, Kharmasi Industrial Estate, Omega Industrial Estate and IDEB Industrial Estate. Large Industrial House like Videocon, HCL, India Glycols Limited, Jindal Refineries Limited and many other Paper and Suger mills have their presence in this region.


There are around dozens of famous Temples in Kashipur. At one time there were around 32 temples in Kashipur. In Kashipur Teerth Drona Sagar, Maa Mansha Devi Mandir, Chaiti Temple and Gurudwara Shree Nanakana Sahib is majorly famous.

1) Drona Sagar is related with the Guru Dronacharya, the guru of Kauravas and Pandavas of Mahabharata. Dronasagar is one of the famous temple of Kashipur where many people come daily for worship. According to the Skand Puran, in Drona Sagar, water remains always and sacred as the Ganga. It was considered a very sacred place after Gangotri, Yamunotri, Kedarnath and Badrinath. It is said that Gautam Buddha, Guru Nanak Dev, Tulsidas, Guru Gorakhnath and Dayanand Sarswati had spent some time at Drona Sagar for spreading knowledge.

2) Maa Mansha Devi Mandir is sitauted in Kashipur at Lahoriyan.

3) Bheem Shankar Mahadev also known as Shree Moteshwar Mahadev, is one of the famous temple of Lord Shiva in Kashipur. This is the place where Lord Shiva is located in his full face as a Jyotirlingam known as Bheem Shankar.

4) Chaiti Temple is also a famous temple in Kashipur, situated on Kashipur-Bajpur route. Every year during 'Navratras' (In March), lakhs of pilgrims come here from various place to worship the Goddess and enjoy the Chaiti fair also. This temple is also known as Maa Bal Sundari Mandir. The structure of Chaiti Temple resembles the mosque, one of the reason would be its construction during Mughal period.

5) Gurdwara Shri Nankana Sahib is associated with the first Guru, Guru Nanak Dev ji who came here after visited nanak Puri. He stayed here for some time. The birthday of Guru Nanak Dev ji are the main Gurpurab celebrated here.

According to the Archaeology Department, At the time of Legendary the name of Kashipur was Ujjaini.

The nearest airport from Kashipur is 64 km away at Pantnagar. Kashipur is connected to Kashipur, Moradabad, Kathgodam, Bareilly, Kanpur, Lucknow, Chandigarh, Mumbai, Jaisalmer and Delhi by rail network and buses are also available 24 hours here.




काशीपुर उत्तराखंड राज्य के ऊधमसिंह नगर जिले का एक महत्वपूर्ण शहर है। काशीपुर एक ऐसा प्रदेश है जिसके प्रमाण केंद्रीय पुरातत्व विभाग को मिल चुके है कि यह महाभारत कालीन युग से है। काशीपुर एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी है। काशीपुर में स्थित द्रोणसागर का उल्लेख चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी अपनी यात्रा के दौरान एक पौराणिक एवं तीर्थ स्थल के रूप में किया है। आज भी आप बड़ी आसानी से काशीपुर में पुराने शहर के अवशेष की पहचान कर सकते हैं। काशीपुर शहर चंद वंश के अधिकारी काशीनाथ के नाम पर है, जिन्हे इस जगह के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता हैं।

काशीपुर एक ऐसा शहर है जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। ताम्र युग के दौरान, काशीपुर भारत के विकसित शहर में से एक था और एवं यहाँ पर ताम्बे से बने उपकरण और बर्तनो का मध्य एशिया तक व्यापार किया जाता था (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गई पुष्टि के अनुसार)। आज भी, काशीपुर अपने क्षेत्र में बढ़ते उद्योगों के विकास के लिए प्रसिद्ध है। यहां मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों में से नंद नागर औद्योगिक एस्टेट, भीम नागर औद्योगिक एस्टेट, बालाजी औद्योगिक एस्टेट, खरमासी औद्योगिक एस्टेट, ओमेगा औद्योगिक एस्टेट और IDEB औद्योगिक एस्टेट स्थित हैं। वीडियोकॉन, एचसीएल, इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड, जिंदल रिफाइनरीज जैसे बड़े औद्योगिक हाउस लिमिटेड और कई अन्य पेपर और शुगर मिलों की इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति है।


काशीपुर मे एक दर्जन से अधिक मंदिर स्थित है। एक समय, काशीपुर में ३२ से ज्यादा मंदिर थे। तीर्थ द्रोणासागर, माँ मंशा देवी मंदिर, चैती मंदिर एवं गुरद्वारा श्री नानक साहिब का काशीपुर में अलग ही महत्व है।

1) द्रोणासागर गुरु द्रोणाचार्य से संबंधित है जो कि महाभारत युग में कौरवो और पांडवो के गुरु थे। द्रोणसागर काशीपुर के प्रसिद्ध मंदिरो में से एक है जहाँ पर अनेको श्रद्धालु प्रतिदिन पूजा-अर्चना के लिए आते है। स्कंद पुराण के अनुसार, द्रोणसागर में पानी गंगा के रूप में हमेशा और पवित्र बना रहता है। काशीपुर गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के बाद एक बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता था। कहा जाता है कि महात्मा गौतम बुद्ध, श्रीगुरु गोरखनाथ, संत तुलसीदास, दयानंद सरस्वती एवं श्रीगुरुनानक देव जैसे विद्वान भी अपने समय में यहाँ स्थित द्रोणसागर में अपना ज्ञान बाँट चुके है।

2) मां मंशा देवी मंदिर काशीपुर में लहरियां पर स्थित है।

3) भीम शंकर महादेव भी काशीपुर में प्रसिद्ध मंदिरो में से एक है और यह मंदिर भगवान शिव से सम्बंधित है एवं गुरुद्वारा श्री नानक साहिब भी काशीपुर में सिखों के लिए पवित्र स्थान में से एक है।

4) चैती मंदिर भी काशीपुर में एक प्रसिद्ध मंदिर है, जोकि कशिपुर-बाज़पुर मार्ग पर स्थित है। प्रत्येक वर्ष 'नवरात्र' (मार्च के महीने में) के दौरान, लाखो तीर्थयात्री अलग-अलग जगह से माता चैती की पूजा करने हेतु काशीपुर में आते है एवं भव्य चैती मेला का भी आनंद लेते है। यह मंदिर माँ बाल सुंदरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। चैती मंदिर की सरंचना मस्जिद जैसे दिखती है, जो यह दर्शाता है कि इस मंदिर का निर्माण मुग़ल कल के दौरान हुआ होगा।

5) गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब प्रथम गुरु से जुड़ा हुआ है, गुरु नानक देव नानक पुरी के दौरे के बाद यह पर आये थे तथा कुछ समय के लिए काशीपुर में रुके भी थे। गुरु नानक देव जी का जन्मदिन यहाँ पर गुरपुरब वाले दिन मुख्य रूप से मनाया जाता है।


केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अनुसार पौराणिक काल में काशीपुर का नाम उज्जैनी था।

काशीपुर से निकटतम हवाई अड्डा 64 किमी दूर पंतनगर में है। काशीपुर रेल नेटवर्क से रामनगर, मुरादाबाद, काठगोदाम, बरेली, कानपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जैसलमेर और दिल्ली से जुड़ा है एवं बसे भी यहाँ पर 24 घंटे उपलब्ध है।


History